दादा तेरे चरणों की

दादा तेरे चरणों की, गर धूल मिल जाये।
सच कहता हूँ मैं गुरुवर, तक़दीर बदल जाये।

सुनता हूँ तेरी रहमत, हर रोज बरसती है
इक बूंद जो मिल जाये मेरा मन ही बदल जाये।

ये मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा ध्यान धरूं
इसे जितना भी समझाऊं उतना ही मचल जाये।

नज़रों से गिराना न, चाहे जो भी सजा देना
नज़रों से जो गिर जाये, मुश्किल है संभल पाना।

मैं हूँ तो अधम पापी, पर ख्वाहिश है मेरा
तुम सामने हो मेरे, चाहे दम ही निकल जाये।

दादा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये
सच कहता हूँ मैं गुरुवर, तक़दीर बदल जाये।

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