दादा का खजाना

(तानों में रहूँ छू लो तुम ……)

लूट रहा, लूट रहा, लूट रहा रे।
दादाका खजाना, लूट रहा रे रे।

लूट सके तो लूट ले बन्दे, दादा का दरबार है।
ऐसा मौका फिर न मिलेगा, एक यही दरबार है।
इनकी शरण में आकर के, जो कुछ भी मांगोगे
मिल गया रे।

लटा रहा, लूट रहा, लूट रहा रे।
दादा का खजाना, लूट रहा रे।

हाथों हाथ मिलेगा परचा, ये दरबार निराला है।
घर घर पूजा हो कलयुग में, दादा रखवाला है।
जिसने भी दादा तेरा नाम लिया …
किस्मत का खुल गया ताला रे।

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